भारतीय स्वतंत्रता का अमृतमहोत्सव वर्ष देशभक्ती एवं राष्ट्रनिर्माण
दोस्तो हर वर्ष हम स्वतंत्रता दिवस को बडे धुमधाम से मनाते है I हर वर्ष १५ अगस्त और २६ जनवरी के दिन हम राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा Ilको बडे ही शान से फहराते है , Iराष्ट्रगान गाते है , खुशीयाँ मनाते है , जो कि बहुत अच्छी बात हैI परंतु सवाल ये उठता है की केवल 15 ऑगस्ट और 26 जनवरी के दिन तिरंगा फहराने से क्या हमारी देशभक्ती साबित हो जाती है ?क्या राष्ट्रगान के 52 सेकंद मे एकाग्र रहणे से हमारी देशभक्ती दिखाई जाती है ? क्या फेसबुक व्हाट्सअप पर तिरंगे वाली डीपी लगाने से हमारे देशभक्ती का दायित्व पूरा हो जाता है और क्या इन्ही दो दिनों के लिए हमारी देशभक्ती जागृत होती है ? नही देशभक्ती एक या दो दिन के लिये मर्यादित नही है बल्कि हर एक दिन और दिन का हर एक पल देश के नाम समर्पित हो ,यही सच्ची देशभक्ती है I
किसी को लगता है
हिंदू खत्ररे मे है |
किसी को लगता है |
मुसलमान खतरेमे है |
पर हम कहते है |
जाती-धर्म का चष्मा
उतारकर देखो
यारो हमारा पूरा हिन्दुस्तान खतरेमे है |
1947 तक भगतसिंग से लेकर स्वातंत्र्यवीर सावरकर तक, गांधीजी से लेकर सुभाषचंद्र बोस तक इन्ही स्वातंत्र्य सैनिको ने अपने अमूल्य प्राण देश के लिए समर्पित करके देश को आजादी दिला दी I मगर इस आजाद देश मे हम क्या कर रहे है? क्या इस आजादी के ऋण को ध्यान में रखकर जी रहे है ? नही इस आजाद देश मे हम जब चाहे तब धरना प्रदर्शित कर रहे है I जब चाहे सरकारी संपत्ती को नुकसान पहुंचा रहे है ,जहा चाहे वाहा गंदगी फैला रहे है .सडक पर मन चाहे वैसी गाडी चला रहा है ,जब चाहे जहॉं चाहे लडकी योंसे छेडखानी कर रहे है I और तो और हम भारतीय नागरिक वसूलों के बडे पक्के होते है , बिना फायदे के ना कोई काम करते है ना कराते है | लोक भले इसे कुछ भी कहे लेकिन हम इसे फायदा ही कहते है | तो सवाल हे उठता है कि देशभक्ती क्या है ?और राष्ट्रनिर्माण से उसका क्या संबंध है?
देशभक्ती देशभक्ती देशभक्ती राष्ट्रनिर्माण का एक ऐसा हथियार है , जो अपने देश को सबसे अधिक कामीयाब देश बना सकता है I जरुरी नही की आप देशसेवा तभी भी कर सकते है जब आप आर्मी मे हो या कोई ,देश सेवा संस्था से जुडे हो |एक वक्त था जब देश पर मर जाने को, मीट जानेको , फाशी जाने को कहता तो देश के लिए लोग हसते हसते लोग चढ जातेथे पर अब नही I अब आप कही भी कभी भी कर सकते हो ? अगर आप एक आम नागरिक हो और एक आम नागरिक की आप सहायता करना चाहते हो, तो वही आप सब थी देशभक्ती है | ' वसुदेव कुटुंबकम हे विश्वची माझे घर यह सोचकर अगर आपको अपने देश का एक एक कोना अपने घर जैसा लगे, तो वही आपकी देशभक्ती है | अगर अपने देश का हर नागरिक पिता, भाई बंधू सखा लगता है और हर एक नारी में मातृत्व का रूप दिखता है, तो वही आपकी देशभक्ती है I यदि गाडी चलाने के सभी नियं मों का पालन करते है और यदि कोई रास्ते पर दुर्घटना होती है तो आप उसे अस्पताल तक लेने की सायहता करते हो तो वही आपकी देशभक्ती है I अनावश्यक बिजली का इस्तेमाल न करके बचत करना, बहता हुआ जल, पेड की कटाई इस पर आप प्रतिबंध लगाते हो तो वही आपकी देशभक्ती है | इससे भी महत्त्वपूर्ण बात यह है कि, जिस समाज से राष्ट्र बनता है, अस उसी समाज के समाज के प्रति लगाव बनाये रखना ,एक - दुसरे से शांती सें व्यवहार करणार यांनी की मानवता से व्यवहार करणा यही सच्ची देशभक्ती है | क्यों कि मानवता ही एक ऐसा धर्म है राष्ट्र निर्माण कराने के लिए |
एक किसान जो सर्दी गर्मी और बरसात मे दिन रात मेहनत करके देश के लिए अनाज पैदा करता है, जो हमारे देश के हर नागरिक की भूक मिठाता है |सोचो अगर किसान सिर्फ अपने लिये ही अनाज पैदा करे तो कितने लोग भूके मर जायेंगे किसान की यही बात हमे उसकी देशभक्ती का महत्व समझाती है I जब हम निजी स्वार्थ को छोडकर देश का विचार करते हुए कार्य करेंगे तो वही हमारी देशभक्ती है | हम नही मानते की देश के विकास से हमारा विकास होगा पर हम हे मानते है जब हम अपने साथ साथ दूसरों का विकास करेंगे, यदि मै और मेरे साथियों को आगे ले चलो तो सभी देश का विकास होगा I सबका साथ सबका विश्वास सबका प्रयास सबका और सबका विकास यहसिर्फ नारा नही है तो यही एक यशस्वी सीढी है राष्ट्र निर्माण कराने की I राष्ट्र का निर्माण लोगोंका कल्याण , संसाधनों का सही वितरण ,लोगों की एकता एकजुटता और जनचेतना से है | वोट और चुनाव आधारित राजनितिका बाजार हे |सत्ता पाने के लिए हर कोई हर आदमी कुछ भी करने को तयार है और इसी प्रकार के बीच मे से भ्रष्टाचार का पौधा बडा हो रहा है और बढता रहेगा जब तक हम सबी भ्रष्टाचार रोखणेके लिए उपाय नही करते तब तक हे चलता रहेगा|संक्षिप्त मे हम यही कहना चाहते है कि राजनीति का धंदा हो रहा है I रचनात्मक राजनीति का अभाव ,जनता और युवाओ में राजनीतिक जागृतता की कमी ,मीडिया के गिरते मानक राष्ट्र निर्माण के रास्ते मे बडे खतरे बन रहे है I वर्तमान की स्थिति देखते हुए कोरोना महामारी मे जनता ओर युवावो मे खबरदारी और जिम्मेदारी की कमी नजर आती है I हम सब मिलकर ठान लेंगे तो कोरोना क्या चीझ है इतनी बुलंद हिंमत होनी चाहिये हम मे . हमारी सचेतना और जागृतता मे | कृषी क्षेत्र की बात करे तो कृषी कायदे पीछे लेने से कुछ नही होगा बल्कि देश का हर एक किसान बदलते तंत्रज्ञान के साथ बदलेगा और Land to Land योजना नही बलकी लॅब टू लँड योजना के माध्यम से उसके खेत मे क्या कहता है उगाता है और बाजार में क्या बिकता है ये जब उसको पता चलेगा तभी राष्ट्रनिर्माण होगा |भारत मे हिंदू मुसलमान सिख ,ईसाई जैसे अनेक जाती धर्म के लोग रहते है इससे देश की विविधता स्पष्ट होती है I इसअनेकता मे एकता दृढ हो जाये तो तभी राष्ट्रनिर्माण हो जायेगा है | इस राष्ट्र की महत्त्वपूर्ण ताकत है आजका युवक ,जिस दिन ये युवक सोशल मीडिया मे ऍक्टिव्ह नही बल्कि सोशल रायटिंग मे जब ऍक्टिव हो जायेगा तभी राष्ट्र निर्माण होगा I भारतीय नारी को आरक्षण नही बल्कि उसको संरक्षण जब मिलेगा तभी राष्ट्रनिर्माण होगा I एक तरफ इतना जल बह रहा है की उसको बंद करने तक का समय नही है हमारे पास और एक तरफ उसी जलके एक एक घुंटके लिए तरसते है लोगों पर मुझे लगता है कि अतिरिक्त बह रहा जल बचाके निर्जल भाग की और परिवर्तित करेंगे तभी राष्ट्रनिर्माण संभव है | इस देश मे भ्रष्टाचार नाही , मानवता धर्म का शिष्टाचार जब बढेगा तभी राष्ट्रनिर्माण होगा | औद्योगिक क्षेत्र के चलाते रखने की उसकी कार्यशक्ती का जब सही मूल्य होगा तभी राष्ट्र निर्माण होगा | सबसे महत्वपूर्ण इस गणराज्य मे मतदार दाता अपने मतदान अधिकार को अपने स्वार्थ के लिए बिकने के बजह अपने देश के हित के लिए अपना मतदान देगा तभी राष्ट्रनिर्माण होगा
अंत मे हम यही कहेंगें की,
हमारा एक ही धर्म है ,
हमारा देश पहले,
हमारा एक धर्मग्रंथ है,
हमारे भारत की राज्यघटना, हमारी एक की भक्ति है ,
वो हैभारत माता की भक्ति,
और हमारा एक ही कार्यसंकल्पहै सबका साथ ,सबका विकास सबका विश्वास सबका प्रयासl
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